पागलपन की हद कहाँ तक जा सकती है आप इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। आप शायद भूले न हों तो कुछ दिन पहले राजस्थान के Rajsamand की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वाइरल हुई थी। वीडियो मे एक आदमी लव जिहाद के नाम पर किसी मुस्लिम इंसान को पहले तो मारता है और फिर उसे जिंदा जला देता है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

वीडियो ग्राफिक्स

वीडियो वाइरल होते प्रशासन हरकत मे आई और जिसने हत्या की उसे गिरफ्तार कर पूछताछ किया जाने लगा। कई मामले भी खुलकर सामने आएँ। कुछ लोगों का कहना था (जैसा की अभियुक्त खुद वीडियो मे लव जिहाद का कई बार जिक्र करता है)  की जिसकी हत्या हुई वो लव जिहाद मे लिप्त था। उसने अभियुक्त की बहन के साथ किसी तरह की बत्तमीजी की थी। यदि ऐसा है भी तो कानून किसी को खुद हीं सजा दे देने की इजाजत नहीं देता। कानूनी प्रक्रिया देश मे इसी लिए है ताकि किसी को जब भी परेशानी को तो वो उसके पास जा सके। पर आज हालत ऐसे दिख रहे हैं कि लोग खुद हीं हर फैसला सुनाना चाहते हैं। मामला यहाँ तक ठीक था पर हद तब हो गई जब अभियुक्त के हिरासत मे लिए जाने के विरोध मे कुछ गुंडे और शरारती तत्वों ने उदयपुर मे तोडफोड की और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किया।

 

ये कैसे लोग हैं? कहाँ से आते हैं ये सब ? किस तरह से इनकी लोब्बिंग होती है ?

 

यदि हमें एक तरफ तुरत से काश्मीर मे पत्थरबाज़ गलत दिख जाते हैं तो ये लोग कहाँ से सही और देशभक्त होते हैं। वीडियो पर हत्यारे के सपोर्ट मे आए कमेंट्स पहले हीं हमें सोचने पर मजबूर कर रहे थे। लोग कैसे किसी की हत्या को सही ठहरा सकते हैं? कैसे कोई किसी हत्यारे को बढ़ावा दे सकता है ?

उदयपुर मे हुए मामले मे अभी तक 175 लोगों को हिरासत मे लिया जा चुका है। बड़ी बात यह है कि इनमे से अधिकतर युवा हैं। केसरिया साफा बांधे ये युवा हमें किसी खास धर्म की ओर ध्यान दिलाना चाहते थे। युवाओं को ऐसा करता देख एक पल को सोचने पर मजबूर होता हूँ कि लोग कहते हैं भारत युवाओं का देश है। यदि ये हमारे देश के युवा हैं तो मुझे शायद डरना चाहिए। पर डरना किससे ? इन युवाओं से नहीं, अपने देश के भविष्य से !

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