Mandira bedi ने कल इन्स्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर की. तस्वीर शेयर करने के कुछ ही देर बाद उन्हें याद दिलाया गया की वो भारत जैसे एक संस्कारी देश में रहती हैं. तस्वीर यह रही:

 

फोटो : मंदिरा बेदी Instagram हैंडल।

 

इस तस्वीर को लेकर बहुत सी बातें उनके सोशल मीडिया के अकाउंट पर लिखी और कही गयी. उन्हें एहसास कराया गया की वो इंसान होने से पहले एक औरत हैं और औरत का गहना लाज और शर्म होता है. यह अलग बात है की जिनलोगों ने उनको यह एहसास कराने की कोशिश की, उन्होंने उनकी तस्वीर पर कमेंट करने से पहले इस गहने को गिरवी रख दिया था. यह सिर्फ मंदिरा बेदी के साथ ही नहीं हुआ है, इस साल कई सेलिब्रिटीज को आइना दिखाने की कोशिश की गयी. सोनम कपूर, प्रियंका चोपड़ा , सना फातिमा शेख और भी कई. ये जो लोग हाथ में ऐनक लिए टहल रहे हैं न, आज इन्हीं लोगों के बारे में बातें करेंगे. इन लोगों का एक ख़ास वर्ग है जोकि समाज में अश्लीलता के पैमाने सेट करते हैं और औरतों के कपड़ों की लम्बाई से यह निर्धारित करते हैं की लड़की कितनी चरित्रहीन है. बस देख लेने भर से ही ये लोग आपको किसी लड़की का पूरा इतिहास बता सकते हैं, भले ही देश का इतिहास इनको पता हो या न हो. ये ऐसे लोग हैं जिनको सानिया मिर्ज़ा के जीते हुए मेडल्स से पहले उसकी न ढकी हुई जांघें पहले नज़र आती है. जिनको प्रियंका चोपड़ा के जीते अवार्ड और पाए सम्मान से पहले उसके छोटे कपडे नजर आते हैं. यह बहुत ही शर्म की बात है की जहाँ पूरी दुनिया में जेंडर इक्वलिटी जैसी चीजों को लेकर बहस हो रही है और इस मुद्दे को काफी सीरियसली सोचा जा रहा है, वही भारत अभी भी अपनी बेटियों के तन को ढकने और उनका चरित्र निर्धारित करने में ही व्यस्त है. सबसे दुःख की बात यह है की ऐसे लोगों का एक बड़ा वर्ग है.

भारतीय संस्कारों की बातें करने वाले ये लोग शायद स्वामी विवेकानंद की शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण में कही वो बातें भूल गए या फिर इन्होने उनकी बातें कभी सुनी ही नहीं. स्वामी विवेकानंद ने कहा था की भारत वो देश है जहाँ लोगों की पहचान उसके कर्मों से होती है न की पहनावे से. अब ये मत कह देना की विवेकानंद संस्कारी नहीं थे. अगर उनकी कही हुई बात का मर्म इनलोगों को समझ में आ जाता तो कहना ही क्या था.

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