नोटबंदी को हुए एक साल हो गए। सबने एक साल होने पर खूब कहा और लिखा। हमने भी एक आर्टिकल किया था। अब एक बात और जोड़ना चाहूँगा। बात कम सवाल ज्यादा है। यह जो नोटबंदी हुआ था वो किसके लिए था? सरकार के लिए या जनता के लिए ? यदि जनता के लिए था तो फिर इसके सफल होने का जश्न जनता को मनाना चाहिए। यहाँ तो मामला उल्टा है। सरकार हीं लगी है जश्न मनाने मे। जनता तो बस हाथ जोड़े बैठी है कि चचा एक बार कर दिये, दुबारा सोंच भी न लेना।

अब सरकार एकदम मदमस्त होके नोटबंदी को सफल और सफलतम बताने मे लगी हुई है। सरकार मे बैठे सभी मंत्री नेता लोग ज़ोर शोर से इसे दुनिया का सफलतम इकनॉमिक रेवोल्यूसन बताने मे लगे हैं। क्या पढे लिखे और क्या अनपढ़। सभी आज अर्थशास्त्री हैं। यहाँ तक तो ठीक है, हद तब हो गयी जब एक पढे लिखे नेता जी कुछ अजीब हीं कह बैठे। अब नेता जी ऐसा क्या बोल दिये ये तो बताएँगे हीं लेकिन पहले ये जान लें की नोटबंदी का असली मोटो क्या था?

जब प्रधान सेवक जी ने कहा था की आज रात आठ बजे, तब तक इसका मोटो था कि काला धन समाप्त करना है। हमे लगा वाह क्या मूव है। शानदार। रात को भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखते हुए सो गए। सुबह उठे तो नोटबंदी का मोटो हीं किसी ने बादल दिया था। बोल रहे थे कैश लेस इंडिया करने का मोटो है। हम फिर सोचे कि वाओ ! इससे तो जेब मे ज्यादा नोट लेकर चलना नही पड़ेगा और फिर नोट कम तो पेपर कम और फिर पेपर कम तो पेड़ ज्यादा। मतलब हमने पॉकेट से शुरू कर के प्रकृति तक आने मे दो मिनट भी नहीं लगाए होंगे। दिन पूरा बीता भी नहीं था कि फिर कौनों मोटो चेंज कर दिया। फिर पता चला मोटो है डिजिटल इंडिया। पेटीएम, मोबिक्विक, पैसा-पे , और फिर भीम सबसे गुजरते हुए हमने दो महीने काटे इस उम्मीद मे की इंडिया डिजिटल हो जाएगा ( डिजिटल इंडिया का बंटाधार अभी भी हो रहा है, यहाँ पढ़ें।) लेकिन कहाँ ? उससे पहले कोई बोला ये तो भईया आतंकवाद कम करने के लिए था। दिमाग भन्नाया और पलट के दिये उसको खाने भर, साले वहाँ सीमा पर जवान मर रहे हैं रोज, तुमको मज़ाक लग रहा है। सामने से वो आया और मेरी आंखो मे देखते हुए लगतार बोलने लगा, आर्मी, सीमा , आर्मी , सीमा,जवान। सीना तन गया हमारा और बस। नोटबंदी था आतंकवाद रोकने को। कम से कम अब हमारे जवान तो नहीं मरते होंगे। यह सब सोच समझ कर बैठा हीं था की अब ये नेताजी कूद पड़े। सुनो क्या बोले हैं , कह रहे हैं की नोट बंदी होने से देह व्यापार मे कमी आई है। गुरु गज़ब। हम अब कुछ नहीं कहेंगे। पढ़िये नीलोत्पल मृणाल का खुला खत-

माननीय
मंत्री महोदय रविशंकर प्रसाद जी,
मेरा नाम नीलोत्पल मृणाल है। मैं मूलतः बिहार से हूँ और झारखण्ड के संथाल परगना में सुदूर देहात में रहता हूँ।
मैं हमेशा सरकार पे भरोसा करने वाला अच्छा नागरिक रहा हूँ इसी नाते सरकार ने अपने स्कूल के माध्यम से जितना पढ़ाया लिखाया केवल उतना ही पढ़ लिख पाया और अपनी ओर से ज्यादा पढ़ लिख काबिल बनने की कोई प्राइवेट कोशिश नही की।

 

युवा हूँ और 2014 से पहले भी बेरोजगार था और 2014 के बाद भी भयंकर बेरोजगार हूँ और फ़ख्र करता हूँ कि जो भी हूँ सरकारों की बदौलत ही हूँ।

 

बेरोजगार होने के कारण हम सब युवाओं का गांव में एक ही काम रहा है, दिन भर बैठ के गांजा पीना और अच्छे दिन का इंतज़ार करना।
बचपन से ही भांग,गांजा एवं शुद्ध किस्म का ताड़ी सेवन करता रहा हूँ। आप fb पे मेरे पोस्ट और ख़ास कर प्रधान प्रचारक with अतिरिक्त प्रभार pm ऑफ़ india also के बारे में जब पोस्ट पढ़ेंगे तो आपको यकीन हो जायेगा कि मैं किस लेवल पर जा के गांजा ताड़ी पीता हूँ।
हम सभी गांव के दोस्त कक्षा 3 से इसका सेवन करते हैं।हम अक्सर इलाके के बड़े बड़े चिलमबाज़ को चुनौती देते आये हैं कि ,है कोई हमारे जोड़ का नशेड़ी?

पर अभी कल जब हम सभी बड़े शान से गांजा पी रहे थे तभी किसी ने आपका बयान दिखाया नोटबंदी पर, “नोटबंदी से देह व्यापार में कमी आयी है।”

ये बयान पढ़ते ही हमारा घमंड चूर चूर हो गया सर।मेरा एक दोस्त चिलम छोड़ कूद के मोबाइल छीना, “मुझे फोटो दिखाओ गुरुआ का”हम सब भी भौचक्के थे कि ये कौन आ गया हम से टक्कर लेने मैदान में। तस्वीर देखी तो पहचान गया। देखा आप थे।हम सभी दोस्तों ने तत्काल अपनी चिलम और दोपहर तक पी लेने को रखी ताड़ी की सभी सात बाल्टी आपके तस्वीर के आगे समर्पित कर रख दी और सबने जोर से जयकारा लगाया-

 

” हमारा गुरुवर, बाबा रविशंकर”

 

सर, सही बता रहा हूँ कि 20 साल से पीने खाने के कैरियर में हमारे ग्रुप को इतना हाई लेवल चुनौती पहली बार मिला है सर।हमलोग तो एक दूसरे का चेहरा देख लाज़ से मर रहे थे कि, फाल्तुए में एतना घमंड था अपना अनुभव पर हमलोग को। जबकि हमलोग कोनो कमजोर माल नही लेते थे। फिर भी सच तो सच है सर कि हमलोग तो 24सों घंटे पी के भी इस लेवल पर नही पहुँच पाये सर। मुझसे तो ख़ास कर कई लाल सलामी बल्लेबाज़ तक संकट में माल उधार ले जाते हैं पर आज तक इतना हिलोरन माल नही दिया लिया। मेरे संपर्क में और भी कई लाल,नीले, पीले ,भगवे सलाम प्रणाम वाले भी साथी हैं।उनके बीच भी इस टक्कर का माल मिलना कभी नसीब नही हुआ सर।हम सभी साथियों ने कल ही तय किया कि आपको अपना कुलगुरु मान चिट्ठी लिखें और पूछे कि आखिर आप लोगों का माल कहाँ से आता है जो इतना ज्यादा हाहाकारी असरकारी मौज देता है।

सर, आप देश के मंत्री हैं, आपको हमने चुना है इसलिए हमारा ये अधिकार है कि हम जान पायें कि हमने जिसे चुन कर देश चलाने भेजा है उसके भेजे में किस क्वालिटी का माल भरा जा रहा है और ये माल हम आम चिलमधारियों के लिए क्यों नसीब नही।

सर, आपकी सरकार कहती है कि “सबका साथ,सबका विकास ” तो फिर इस विकास यात्रा में हम लोग को अकेला छोड़ आप अकेले अकेले सारा जड़ी क्यों फूंक देते हैं सर?

सर, हम जानते हैं कि आपलोगों का अपना नेटवर्क है और अभी पार्टी के ही नेताओं में बांटा बांटी करते माल खत्म हो जाता होगा। मध्य प्रदेश में जिस तरह शिव मामा जी ने अपनी सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताया वो बताता है कि आपलोग जिस जड़ी का सेवन करते हैं वो जड़ी खुद आदि देव शिव जी के जड़ी से भी हज़ार गुणा ज्यादा असरकारी है। कल ही एक काली सूची में नाम आने पर आपके एक सांसद ने पत्रकार के सवाल पूछने पर तख्ती पे लिख के बताया”मैं भगवत गीता के यज्ञ में सात दिन के लिए मौन हूँ” मतलब इस लेवल का सर्कस?इस लेवल की जोकरी?

सर, प्लीज़ नु सर..सर देखिये हम युवा के बारे में अभी कल ही आपने ही कह दिया कि बेरोजगार केवल वही लोग हैं जो अयोग्य हैं, तो अब इतने बेरोजगारी में गांजा ही सहारा है जिसे पी पा हम अपनी जिंदगी घसीट घिस के ख़तम कर लें और बचे रहें तो 2019 में आपको वोट दे सकें।
कम से कम इतने के लिए तो फरियाद सुन लीजिये और हमारी आखिरी इच्छा पूरी कर दीजिये कि हम नरक में आपके आने पर पहले से जयकारा लगा गेट पर खड़ा रहेंगे और बाकि दल के नेताओं से कह सकेंगे कि बाबा रविशंकर जी के कारण ही हमलोग भी उस उच्च स्तरीय जड़ी का सेवन कर दुनिया से विदा हुए थे।

अच्छा अब जरा होश की बात भी सुन लीजिये सर, सर, देश पर कल कोई और राज कर रहा था,आज आप हैं और कल कोई और होगा।राज तो हमेशा कोई नही रहा, रह जाता है उसका किया धरा। आपको निम्बू चाट के बड़े होश हवास में ये याद दिलाना चाहता हूँ कि, आप भारत जैसे विशाल और गरिमामयी देश के मंत्री हैं।एक समय ठीक ठाक कमाऊ वकील भी रह चुके हैं। पर सर, किसी बड़े लोकतांत्रिक देश के मंत्री होने और किसी व्यापारी राजा के दरबारी होने का फर्क समझाइये खुद की आत्मा को।

नोटबंदी जैसे महाप्रभावी मुद्दे पर ये क्या खा पी के बयान दिए थे आप सर?

क्या इस देश को अब इतना भी उम्मीद नही करना चाहिए कि देश का मंत्री भले अपने निर्णय के पक्ष में बोलेगा लेकिन तार्किक तो बोलेगा, मूर्खों की तरह तो नही न बोलेगा कम से कम। दुनिया का कौन अर्थशास्त्री नोटबंदी के प्रभाव पर उत्तर मांग रहे लोगों को ये जवाब दे उसका फायदा बताएगा कि, नोटबंदी से देह व्यापार कम हुआ और ये इसकी सफलता है। महराज याद हो तो बताइये कि क्या इसलिए किया था नोटबंदी?

रवि बाबू, वकील हैं न आप?

जरा भी नही सोंचे, कि जिस नोटबंदी के लिए 50 दिन मांग देश का नक्शा बदल देने की कसम खाई थी एक बातूनी ने वो उसके 364 दिन बाद भी उसी मुद्दे पर कुछ बोलने नही आया। दुनिया का सबसे बातूनी प्रधानमंत्री जिस मुद्दे पर मुँह खोलने में 56 इंच का सीना सिकुड़ के रह गया और जिस मुद्दे पर दुनिया के एकमात्र जीवित कौटिल्य उर्फ़ चाणक्य कुमार शाह चूं नही बोले उस मुद्दे पर आपको अपनी बेवकूफ़ी दिखाने का क्या प्रसाद मिला? रवि प्रसाद जी, राजनीति का स्तर ये है कि ये रोज नया सर्कस दिखाती है और रोज़ नये जोकर से मिलाती है।
आपको बस यही कहना चाहता हूँ कि इस बार जोकर ऑफ़ द वीक का खिताब आपको जाता है जो आपने अपने ही मामू MP वाले से छीना है।

बधाई।जय हो।

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