भारत मे विविधता है ऐसा कई बार सुना है और देखा भी है। विविधता के साथ-साथ कई ऐसी बातें भी होती हैं जो इसे खास बनाती हैं। इलैक्शन कमीशन आपके वोट की कितनी कीमत रखता है इसका अंदाजा आप गुजरात के एक ऐसे वोटिंग बूथ को देखकर लगा सकते हैं जहां सिर्फ एक वोटर है। गुजरात के गीर के बानेज मे रहते हैं महंत भारत दास दरशनदास ।

पिछले कई वर्षों से इलैक्शन कमीशन इनके लिए अपने अधिकारी गीर के घने जंगलों मे 35 किलोमीटर अंदर भेजते हैं। गीर अमूमन एशियाटिक लायन का एक मात्र घर है। इलैक्शन अधिकारी अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं कि महंत भारतदास का कीमती मत लिया जा सके। इसके लिए अधिकारी एक रात पहले हीं मंदिर से 10 कदम दूर वन विभाग के कमरे मे रुकते हैं। सुबह उसी कमरे को पोलिंग बूथ मे बदल दिया जाता है और फिर महंत भारतदास अपना मत दे पाते हैं।

महंत भारतदास 20 वर्षों से इसी तरह बिना किसी सुविधा के ज़िंदगी बिता रहे हैं, न बिजली, न फोन, न मनोरंजन का कोई साधन। पढ़ाई छोड़ महंत भारतदास कई वर्ष पूर्व इस रास्ते पर जा चुके थे।

इलैक्शन कमिशन के अधिकारी 35 किलोमीटर चल कर क्यूँ आते हैं?

इसका पहला जवाब तो यह है कि लोकतन्त्र मे सभी को वोट देने का समान अधिकार है। चाहे वह समाज के निचले तबके का हो या ऊपरी पायदान पर बैठा कोई आदमी। वह साधु हो, संत हो, चाहे कोई हो।

दूसरा जवाब यह है कि इलैक्शन कमीशन के मुतबिक, अपना मत डालने के लिए किसी भी वोटर को 2 किलोमीटर के दायरे मे आने वाले पोलिंग बूथ हीं जाना होता है। इस हिसाब से देखें तो महंत भारत दास के हिस्से एक भी पोलिंग बूथ आता हीं नहीं। इस लिए कमीशन के अधिकारी खुद चलकर उन तक पहुँचते हैं।

क्या कहते हैं खुद महंत भारतदास दरशनदास  ?

महंत भारतदास यह अच्छे से जानते हैं कि वो खास हैं। उनके मत का सम्मान होता देख वो भी पूरी कोशिश करते हैं कि लोकतन्त्र के दिये इस एक हक़ को वो भी पूरा सम्मान दें।

वह आगे कहते हैं:-

 

मेरा मत जरूरी है। याद करें जब बीजेपी पार्लियामेंट मे एक वोट से अविश्वास प्रस्ताव हार गई थी। इसलिए बस एक वोट भी उतना हीं जरूरी है जितना हजार। मैं सम्मानित महसूस करता हूँ कि चुनाव अधिकारी इतना दूर चलकर मेरा मत लेने आते हैं।

 

 

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