श्री राजपूत करणी सेना का गठन हुआ था साल 2006 में। यह संगठन बना था एक सिद्धांत को लेकर, इनका एक उद्देश्य था, एक लक्ष्य था। उद्देश्य था राष्ट्रीय एकता, जातिगत आरक्षण को खत्म करना और भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करवाने का। संगठन को बनाने वाले थे लोकेन्द्र सिंह शक्तावत कलवी। संगठन बना और शांत हो गया। शायद अंदर ही अंदर काम चलता रहा हो पर संगठन के बारे में किसी को ख़ास कुछ पता नहीं चला।

फिर आया साल 2008, एक पिक्चर आयी। पिक्चर थी ‘जोधा अकबर’। फिल्म बनाने वाले थे आशुतोष गोवारीकर और लीड रोल में हृतिक रोशन और ऐश्वर्या राय थे।

 

तब राजपूत करणी सेना ने पहली बार सुर्खियां बटोरी थी फिल्म का विरोध कर के।

जोधा अकबर के समय भी इनका यही कहना था कि इतिहास के साथ छेड़ छाड़ हुई है। राजपूत सेना के अनुसार दरअसल ‘जोधा’ अकबर के बेटे सलीम की पत्नी थीं , न की अकबर की। बहुत ही हो हल्ला हुआ। राजपूत सेना ने आशुतोष गोवारीकर से लिखित में माफ़ी मांगने को भी कहा पर गोवारीकर साहब ने ऐसा नहीं किया। फिल्म आयी तो राजस्थान के कुछ सिनेमाघर वालों ने इस फिल्म को तब दिखाने से इंकार कर दिया था। बहरहाल फिल्म पुरे देश में रिलीज़ की गयी और काफी हिट हुई।

साल 2009, सुबोध कॉलेज में दो छात्रों के बीच बहस हो गयी।

बात तब तक छोटी सी थी जब तक छात्रों की जात नहीं टटोली गयी थी। पता चला एक छात्र की जाति ‘जाट’ है और दूसरे की ‘राजपूत’। राजपूत सेना अपनी जाति वाले स्टूडेंट के साथ खड़ी हो गयी और जाट महासभा अपनी जाति वाले लड़के के साथ। छोटी सी बात का तब बवाल मच गया था ।

साल 2010, फिल्म आयी थी ‘वीर’।

वही वीर जिसमें सलमान खान थे और जिससे डेब्यू किया था ज़रीन खान ने। फिल्म बनायी थी अनिल शर्मा  ने। यह वही अनिल शर्मा हैं जिन्होंने ‘ग़दर-एक प्रेम कथा’ भी बनायी है। वीर फिल्म आयी तब राजपूत सेना एक बार फिर चर्चा में आयी। इस बार वो दुखी थे ‘बहादुर समुदाय’ के नाम का फिल्म में गलत उपयोग से। जब फिल्म रिलीज़ हुई तो करणी सेना ने सिनेमाघरों पर हमला बोल दिया और उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। खैर यह फिल्म चली भी नहीं और दर्शकों ने इसे पूरी तरह से नकार दिया था। पर यह शुरुआत थी इस संगठन के हिंसात्मक होने की।

फिर आया साल 2013, ज़ी टीवी पर एक सीरियल आया ‘जोधा-अकबर’।

राजपूत सेना ने इस पर भी विरोध दर्ज किया। विरोध का कारण था इतिहास के साथ छेड़ छाड़। ज़ी टीवी वालों को धमकी दी गयी, उनके खिलाफ कोर्ट भी गए। पर मामला रफा दफा हो गया। सीरियल आया और काफी दिनों तक चला। पर सीरियल के आने के 1 महीने बाद एक खबर आयी की करणी सेना के 40 सदस्यों ने ज़ी टीवी के उन स्टूडियोज पर हमला कर दिया जिन्होंने इस सीरियल के एक हिस्से को प्रसारित किया था। यह था राजपूत सेना का दूसरा हिंसात्मक आंदोलन। पत्रकारों के ट्रेड यूनियन ने इस पर आपत्ति जताई और गिरफ्तारी की मांग की लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।

साल 2017, फिल्म आने वाली है पद्मावती।

राजपूत सेना का नाम काफी चर्चा में है। काफी बयानबाजी चल रही है। अभी हाल में राजपूत सेना ने दीपिका पादुकोण को जलाने वाले इंसान को 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। इससे पहले नाक काटने की धमकी दी थी और संजय लीला भंसाली की गर्दन लाने वाले को 5 करोड़ देने की बात कही गई थी।

देखिये ऐसा है कि अभिव्यक्ति की आजादी सब को है। मुझे, आपको और करणी सेना को भी, मने की सबको। पर राजपूत सेना के तरफ से जो बयान आ रहे हैं उसको मैं अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मानता। यह धमकी है। सवाल यह है कि यह कैसा संगठन है जो एक स्त्री को मार कर, उसे अपशब्द कह कर या नुकसान पहुंचा कर एक दूसरी स्त्री के मान सम्मान की रक्षा का हवाला देता है?

 

राजपूत सेना आप अपने लक्ष्य से भटक गए हैं, आप अपने उद्देश्य से बहुत दूर नज़र आ रहे हैं। आपका उद्देश्य था राष्ट्रीय एकता का पर आप सुबोध कॉलेज में होने वाली घटना के वक़्त अपने इस बात को झूठा साबित कर चुके है। आपका लक्ष्य था भ्रष्टाचार मुक्त भारत का लेकिन पद्मावती के ट्रेलर के आने से एक महीने पहले आपके संगठन के एक सदस्य की भंसाली से पद्मावतीे फिल्म के शांतिपूर्वक चलने के लिए रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग सामने आयी और आप अपने इस लक्ष्य में भी फिस्सडी साबित हो गए।

आपने कहा आप जातिगत आरक्षण का विरोध करेंगे पर मैं जब आप की तरफ देखता हूँ तो आप मुझे एक फिल्म क्रिटीक से ज्यादा कुछ नजर नहीं आते हैं। मैंने तो सदा यही सुना था कि एक क्षत्रिय, एक राजपूत अपने समाज की किसी भी हालत में रक्षा करता है पर आप तो अपने ही देश की बेटी को मारने की धमकी दे रहे हैं। और सब से शर्म की बात ये है कि आप एक स्त्री को धमकी दे रहे। अरे, एक स्त्री पर तो आपको हमला तो बहुत दूर की बात है बल्कि उसके बारे में कुछ अपशब्द कहने से पहले 10 बार सोचना चाहिए था। यह कौन सी करणी सेना है? क्या अब आपका मक़सद सिर्फ फिल्मों के रिव्यु देना रह गया है? आप जातिगत आरक्षण के मुद्दे को लेकर चुप क्यों बैठे हैं? आपकी राष्ट्रीय एकता की बात को फफूंद क्यों लग गयी है?

मैं यह नहीं कहता की आप विरोध न करें, आपको पूरा हक है विरोध करने का। पर विरोध का एक तरीका होता है। आप अदालत की चौखट पर जाएँ, वहाँ इन्साफ मांगें पर नहीं आपको तो फैसला सड़कों पर करना है। सच मानिए आप अपनी इन हरकतों से राजपूत समाज की आन और शान को धूमिल कर रहे हैं। भले ही आप जन्म से एक राजपूत हों पर आपके यह कर्म राजपूत वाले तो बिलकुल भी नहीं।

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