जलवायु परिवर्तन यानि मुद्दा पर्यावरण से जुड़ा है।

पर्यावरण, जिसे लेकर हम ज्यादा न तो सोचते हैं न ही बात करते हैं। अभी कुछ दिन पहले दिवाली पर जब सूप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण के मुद्दे को ऊपर रखते हुए पटाखे बैन किए, तो लोगों के धार्मिक आस्था को चोट लगी। लोग बहस और विरोध पर उतारू हो गए। हमारे लिए वो माना जाने वाला धर्म पहले दिखा, उस दिखाई देने वाले पर्यावरण से। इससे समझ आता है कि हम कितने संवेदनशील हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसपर लोग सबसे कम बात करना पसंद करते हैं।

हमारे स्कूल मे आठवी तक एक सब्जेक्ट होता था।

एनवायरनमेंटल स्टडीज़(environmental studies) यही नाम होता था उस सबजेक्ट का । सप्ताह मे एक दिन क्लास होती थी। ज्यादा तर बार सबजेक्ट के मास्टर साहब पढ़ाने हीं नहीं आते थे। किताब भी इतनी पतली होती थी कि बाकी किताबों के भीड़ मे जाने कहाँ दुबकी पड़ी रहती थी। सबसे बड़ी बात तो यह होती थी कि परीक्षा मे पेपर तो होता था पर इसके नंबर का रिपोर्ट कार्ड पर कोई असर नहीं पड़ता था।

लेकिन किताब पतली होने के कारण मुझे यह सबसे अच्छा विषय लगता था। इसी विषय से जुड़ी एक फिल्म आई है।

चर्चा काफी दिनों से थी। कुछ दिन पहले एक पोस्टर भी आया था जिसमे मुख्य भूमिका निभा रहे संजय मिश्रा एक मजबूत किरदार मे दिख रहे थे। पोस्टर देखकर हीं फिल्म के मजबूत होने का एक संकेत मिल चुका था।

अब ट्रेलर आया है।

ट्रेलर की शुरुआत कुछ प्रकृतिक आपदाओ की स्टॉक फूटेज से होती है और फिर एक डायलॉग:

कोई फंदा लटकाकर मर रहा है, कोई जहर खाकर, अब इस बीहड़ मे सिर्फ उन्ही की चीखें गूँजती है। 

सुनसान बीहड़ और सूखे से बीमार इलाका| ट्रेलर मे एक दृश आपकी नजरे अपनी ओर खिचेगा जब क्लास मे मास्टर जी हमारी तरह हीं पर्यावरण के विषय मे मौसम के बारे मे पढ़ा रहे हैं और बच्चा कहता है कि

साल मे दो ही मौसम होते हैं गर्मी और सर्दी, बरसात तो 2-4 दिन की हो जाती है।

ट्रेलर मे कुछ बातों का विशेष खयाल रखा गया है कि जहां एक ओर सूखे की बात हो वहीं दूसरी ओर बाढ़ से मरते लोगो की बात भी छुट न जाए जिसे रणवीर शौरी ने शानदार ढंग से रखा है। ओड़ीसा का जिक्र भी उसी को ध्यान मे रखते हुए आया है।

ट्रेलर का अंत फिल्म के मुख्य कलाकार संजय मिश्रा के साथ होता है जो बंजर जमीन पर बैठे, अंजुल भर सुखी मुट्टी उठा कर अपने जमाने की बात याद कर कह रहे हैं।

हमारे जमाने मे चार अलग दिशाओं से खुशबू लेकर आत थी वो!  अबे ना जाने का हो गया उसको?  जैसे बीमार हो गई हो। 

दृश्यम फिल्म्स की कोशिश है। फिल्म जब आए तो जरूर देखिएगा, फिलहाल ट्रेलर देखिये।

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