भारत माँ का 28वां अंग। झारखंड बोले तो झार या झाड़ यानि की जंगल और खंड बोले तो जमीन का टुकड़ा। कुल मिला कर ऐसा जमीन का टुकड़ा जहाँ जंगल हो। साल 2000 में बिहार से अलग हुआ झारखंड और तारीख चुनी गयी थी 15 नवम्बर की, नेहरू जी के बड्डे के एक दिन बाद वाला दिन।

 15 नवम्बर ही क्यों?

वो इसलिए क्योंकि 15 नवम्बर को ही महान आदिवासी नेता बिरसा मुंडा जी का भी जन्म हुआ था। बिरसा मुंडा 19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी जननायक थे। उनके नेतृत्‍व में मुंडा आदिवासियों ने 19वीं सदी के आखिरी वर्षों में मुंडाओं के महान आन्दोलन उलगुलान को अंजाम दिया। बिरसा को मुंडा समाज के लोग भगवान के रूप में पूजते हैं। वैसे तो झारखण्ड राज्य की मांग का इतिहास लगभग सौ साल से भी पुराना है जब 1939 इसवी के आसपास जयपाल सिंह जो भारतीय हाकी खिलाड़ी थे और जिन्होंने ओलोम्पिक खेलों में भारतीय हाकी टीम के कप्तान का भी दायित्व निभाया था, ने पहली बार तत्कालीन बिहार के दक्षिणी जिलों को मिलाकर झारखंड राज्य बनाने का विचार रखा था। लेकिन यह विचार 2 अगस्त सन 2000 में साकार हुआ जब संसद ने इस संबंध में एक बिल पारित किया।

असली वजह

झारखंड के अलग होने की वजह वहाँ के लोगों की संस्कृति और इलाके की भौगोलिक स्तिथि का अलग होना भी था। दरअसल झारखंड में आज भी आदिवासी बहुतायत में हैं और इन्होंने ही इस जंगल इलाके को साफ़ कर के खेती लायक बनाया था। खणिज के मामले में भी झारखंड बहुत संपन्न राज्य है और वहाँ के नेताओं को हमेशा से ऐसा लगा की बिहार में रह कर झारखंड का शोषण ही हुआ है उसे वो तरक्की नहीं मिली जिसका वो हक़दार था।

अलग होने के बाद।

अलग होने के बाद भी झारखंड को वो तरक्की नहीं मिली जिसके सपने उस राज्य ने देखे थे। 1991 की जनगणना के अनुसार, राज्य की जनसंख्या 20 मिलियन से अधिक है जिसमें से 28% आदिवासी हैं जबकि 12% लोग अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। झारखंड में 24 जिलों, 260 ब्लॉक और 32,620 गांव हैं, जिनमें से केवल 45% बिजली का उपयोग करते हैं, जबकि केवल 8,484 सड़कों से जुड़े हैं। और यह हालत तब हैं जब झारखण्ड छत्तीसगढ़ राज्य के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा खणिज का उत्पादक राज्य है।

वैसे बिहार के लोग आज भी दिल से झारखंड को अलग नहीं मानते हैं और उनके लिए धोनी आज भी बिहारी ही है न की झारखंडी। यहाँ तक की आज भी बिहार के सिम पर झारखंड में रोमिंग चार्जेज नहीं लगते हैं। क्योंकि उनका मानना है कि दीवारें बन जाने से खून का रिश्ता ख़त्म नहीं हो जाता है। खैर, एक बिहारी की तरफ से बिहार राज्य के छोटे भाई झारखंड को हैप्पी बड्डे, तुम खूब तरक्की करो।

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