सुबह सबेरे जैसे हीं उठो और कम के लिए गूगल खोलो, गूगल बाबा किसी न किसी को श्रद्धांजलि दे रहे होते हैं।

डूडल, गूगल का श्रद्धांजलि देने का अपना तरीका। जिसमे वो जिन्हे श्रद्धांजलि देनी होती है उसकी फोटो की कार्टून कैरेक्टर तैयार करके गूगल के लोगो की जगह लगाते हैं। फिर आए दिन शेयर होता रहता है कि गूगल ने फलाना को याद किया और ढिमकाना को याद किया।

गूगल, जहां कुछ न चाह कर भी लिखो तो कुछ न कुछ उसका मतलब निकल हीं आता है। अथाह ज्ञान का भंडार। कुछ भी चाहिए, बस टाइप करो। तो बात हो रही थी डूडल की और साथ हीं श्रद्धांजलि की।

तो कल तारीख थी 14 नवंबर, यानि बाल दिवस। कल हीं हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन भी था और कल हीं वर्ल्ड डियाबेटीज़ डे भी। तीन बहुत महत्वपूर्ण बातें एक हीं तारीख पर। लाजमी है एक दो छुट हीं जाएंगे, पर ये क्या ?

डूडल बनाया तो होल पंचर का !

बाकी की ये तीन घटनाएँ जो इस तारीख को हुईं थीं वो बेवजह थी ? या वो शायद इतनी महत्वपूर्ण न रहीं हों।

देश के पहले प्रधानमंत्री को भूल जाना बेहद दुखद है। लोग भले किसी के विचारों से बैर रखते हों, पर जिस पद पर नेहरू जी थे उस पद की इज्जत उनके साथ जुड़ी रहेगी। गूगल भले भूल जाए पर हमें याद रखना चाहिए कि आज जिस भारत की हम परिकल्पना कर पा रहे हैं उसमे पंडित नेहरू का बहुत बड़ा योगदान है।

इस किस्म की गलती गूगल से होना थोड़ा सोचने पर मजबूर कर रहा है।

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