एक जमाना था जब हनुमान जी उड़ कर भारत से श्रीलंका चले जाया करते थे, न कोई समस्या होती थी, न पेट्रोल के खर्चे, न वीज़ा लगता था और न पॉल्यूसन का झंझट था।

सब मज़े में था। जमाना बीत गया, लोग बदल गए। अब लोगों को हनुमान जी से दिक्कत होने लगी है। कारण है उनकी खुद की सवारी। माने के हनुमान जी को भगवन माना जाता था पर आजकल उन्हें अतिक्रमण भी मानने लगे हैं। शायद ‘न्यू इंडिया’ का प्रभाव है। पूरी दुनिया के हनुमान जी से बैर नहीं है, बस एक ख़ास जगह के हनुमान जी से है।

दरअसल अब ज्यादा बात नहीं घुमाएंगे, पूरा मामला आपको बताते हैं। मामला है करोल बाग में 108 फ़ीट के हनुमान जी की मूर्ति का। वही हनुमान जी वाली मूर्ति जो बहुत से फिल्मों में भी दिखी है। हाँ, तो हुआ यह है कि दिल्ली हाइकोर्ट में एक NGO ने अर्जी दी थी। अर्जी में शिकायत थी करोल बाग वाले इलाके में आने वाले अतिक्रमण की। शिकायत को पढ़ कर जज साहब नें लोकल ऑथोरिटीज से पूछा है कि क्या इस 108 फ़ीट की मूर्ति को एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा सकता है? क्योंकि विदेशों में ऐसा होता आया है। लोकल ऑथोरिटीज को जवाब देना है अगली सुनवाई में।

अब अगली सुनवाई इस मामले में 24 नवम्बर को है तो अब मामला उसी दिन साफ़ होगा की क्या भारत में भी मुमकिन है इतनी बड़ी मूर्ति को एक जगह से दूसरे जगह तक ले जाना।

 

खैर, फैसला जो भी आये। भावनाएं आहत होनी जल्द ही शुरू हो जाएंगी क्योंकि देश ही भावनाओं का है और अपने देश में भावनाएं जब भी आहत होती है तो हमेशा थोक भाव में आहत होती हैं। हाईकोर्ट को गालियां सुनने के लिए कान का मैल निकाल कर तैयार रहना चाहिए। ट्विटर वीर भी अपनी उँगलियों की कसरत करते हुए पाए गए हैं। पत्रकारों को भी एक मौका और मिल गया है इस स्टोरी पर न्यूज़ बना बना कर इसको सनसनीखेज बनाने का। कुल मिला कर दिल्ली में हनुमान जी पहली बार विवाद में आये हैं और अब देखना है कि उनका ट्रांसफर होगा या नहीं।

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