दो देश एक कॉलेज और अब दो अलग अलग नाम !

बात कर रहे हैं दयाल सिंह कॉलेज की। 1910 मे  पाकिस्तान के लाहौर मे खुले इस कॉलेज को स्थापित कराया था पंजाब नेशनल बैंक और द ट्रिब्यून के संस्थापक

दयाल सिंह मजीठीया ने। बटवारे के बाद साल 1959 मे  दयाल सिंह कॉलेज को करनाल और दिल्ली मे स्थापित कराया गया। जिसे दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने अंदर लिया

मामला क्या हुआ?

बात ये हुई कि कुछ लोग कुछ न करके भी ऊब जाते हैं और सोचते हैं कि चलो कुछ करते हैं। क्या करें? ऐसा करते हैं इसका नाम बादल देते हैं, उसका नाम बादल देते हैं। दयाल सिंह कॉलेज अच्छा चल रहा था। सबकुछ ठीक था। अचानक से किसी को ऐसी जरूरत महसूस हुई कि कॉलेज का नाम दयाल सिंह कॉलेज न होकर वन्देमातरम कॉलेज होना चाहिए। अब लीजिये। अजीब बात कर दी इनहोने। मुहर लग गयी। नाम बदल दिया गया।

पहला कॉलेज खोला गया था पाकिस्तान मे। वहाँ भी 70-75 के आसपास ऐसी हीं बात हुई की नाम बदलकर डाटा साहिब कॉलेज कर दिया जाए। पर वहाँ कुछ बुधद्धिजीवी लोगों ने मिलकर इसको इसके ऐतिहासिक पहचान के साथ जोड़े और बनाए रखा। रिज़ल्ट ये हुआ की सरकार ने कॉलेज का नाम जो था वही रहने दिया। अब वो लोग पूछ रहे हैं कि स्टाफ रूम मे मौजूद दयाल सिंह मजीठीया की तस्वीर जब कोई बच्चा देखेगा और उनके बारे मे पूछेगा तो क्या जवाब दोगे? क्योकि हमारे बच्चे जब पूछते हैं तो हम तो उसे यही बताते हैं कि यही हैं वो जिन्होने इस कॉलेज के लिए इतनी मेहनत की थी। भाई बात तो है। यह देश भारत है। यहाँ जिस काम की कोई जरूरत नहीं होती उसे सबसे पहले किया जाता है। बस ऐसे हीं चल रहा है। चलिये।

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