आधार कार्ड की अगर हम बात करे तो ये आज लोगो के पास एक फ़ोन की तरह रहने लगा है ना ही कोई इसके बिना कुछ काम कर पाता है, और ना ही सरकार के कोई कानून इसके बीना होते है, अब अगर ये बता दिया जाये की आधार कार्ड में वोटर आईडी के मुताबिक गलतियाँ ज्यादा है तो इससे लोगो का परेशान होना तो बनता है|

आधार कार्ड में नाम, पते, पहचान और लिंग संबंधी गलतियों का आंकड़ा मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) के मुकाबले डेढ़ गुना ज्‍यादा है. 9.9 फीसदी लोग राजस्‍थान में और 1.1 फीसदी लोग आंध्र प्रदेश में PDS का लाभ नहीं ले पाते हैं|

वर्तमान में भारत का सबसे लोकप्रिय पहचान पत्र, आधार कार्ड किसी न किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहता है. लेकिन अब इसे लेकर एक नया खुलासा हुआ है. 12 अंकों के यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर और बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन वाले आधार कार्ड में काफी कमियां सामने आई हैं. यहां तक कि  नाम, पते, पहचान और लिंग संबंधी गलतियों का आंकड़ा आधार कार्ड में मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) के मुकाबले डेढ़ गुना ज्‍यादा पाया गया है. आपको बता दे वोटर आईडी कार्ड हमेशा से ही गलतियों के निशाने पर रहा है.

आधार में कमियों का खुलासा भारत में काम कर रही आईडी इनसाइट  ग्‍लोबल डेवलपमेंट एनालिटिक्‍स फार्म ने स्‍टेट ऑफ आधार रिपोर्ट 2017-18 में किया है. रिपोर्ट बताती है कि 8.8 फीसदी आधार कार्डों में गलतियां हैं. आधार को लेकर भारत के तीन राज्‍यों राजस्‍थान, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में घर-घर जाकर सर्वे किया था. जिसमें 21 जिलों के 2947 परिवारों से बात की. यह सर्वे नवंबर 2017 से फरवरी 2018 तक किया गया.में सर्वे रिपोर्ट बताती है कि 9.9 फीसदी लोग राजस्‍थान में और 1.1 फीसदी लोग आंध्र प्रदेश में पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) का लाभ नहीं ले पाते हैं. लेकिन यह भी सामने आया है कि लाभ न ले पाने के पीछे आधार की समस्‍या राजस्‍थान में सिर्फ 2.2 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 0.8 फीसदी ही पाई गई है.

आधार कार्ड के फैले इस नेटवर्क में बदलाव से बड़ी लोगो में चिंताए

आधार कार्ड सर्वे रिपोर्ट कहती है कि आधार की पहुंच काफी विस्‍‍तृत है लेकिन डेटा की गुणवत्‍ता को सुधारने की जरूरत है. इसके साथ ही 96 फीसदी लोग आधार कार्ड से जुड़ी प्राइवेसी (निजता अथवा गोपनीयता) को लेकर भी चिंतित हैं. सर्वे के दौरान लोगों ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि सरकार उनके आधार डेटा का क्‍या करने वाली है?  वहीं 87 फीसदी लोगों ने पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) को आधार से जोड़ने के लिए रजामंदी दिखाई है.

आईडी की साइट – ‘आईडी इन साइट’ एक अंतरराष्‍ट्रीय विकास संगठन है.जोहांसबर्ग, नैरोबी, मनीला, नई दिल्‍ली, सैन फ्रांसिस्‍को और वाशिंगटन डीसी में इसके ऑफिस हैं. यह एशिया और अफ्रीका में विभिन्‍न गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करता है. यह संगठन डिजिटल आईडी, शिक्षा, वित्तीय पहुंच, शासन, स्वास्थ्य और स्वच्छता सहित कई क्षेत्रों में काम करता है. इसका मुख्‍य उद्धेश्‍य नीति नियंताओं के आगे आंकड़े पेश करना है ताकि योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके.
आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने पर भी सत्ता में उठ रहे है सवाल

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘यह मेरा व्यक्तिगत मत है कि आधार को वोटर आईडी कार्ड से नहीं जोड़ना चाहिए. हमने यदि ऐसा किया तो हमारे विरोधी कहेंगे कि पीएम मोदी तांक-झांक करना चाहते हैं कि लोग क्या खा रहे हैं, कौन-सा सिनेमा देख रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से आधार कार्ड को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के पक्षधर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है, इसलिए इनको जोड़ने की बात करना सही नहीं है. उन्होंने मोदी सरकार के ‘आधार’ को मनमोहन सरकार से बिल्कुल अलग बताया.

 

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