भारत में चुनाव आते ही जितनी बल्ले बल्ले खबर पढने वालों की रहती है, उतनी ही ख़ुशी हम जैसे खबर बांटने वाले प्लेटफार्म को भी होती है. कारण ये की भर भर के मसाला मिलता है. ऐसी ऐसी ख़बरें मिलती हैं की इधर से खबर डालो उधर से आपका प्यार निकलता है.

 

लोकतंत्र का महापर्व होता है चुनाव. कहीं भी हो रहा हो हम सब टकटकी लगाए रखते हैं. फोटो साभार: इन्टरनेट

अब ऐसी ही एक खबर मिली है. खबर है मध्यप्रदेश की. जहाँ हाल ही में विधानसभा चुनाव ख़त्म हुए हैं. यहाँ पर एक जिला है शहडोल. शहडोल में जैतपुर विधानसभा क्षेत्र है एक. वहां एक जगह है, बुधार. यहाँ एक पोलिंग बूथ के ईवीएम ने कमाल ही कर दिया. इस ईवीएम में वोट डाले गए 819 लेकिन कुल वोटों की संख्या 864 निकली. है न इंटरेस्टिंग?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ बुधार के बूथ नंबर 124 पर लगे EVM मशीन ने वोट दिखाए 864. जबकि यहां तैनात पोलिंग अफसर ने अपने रजिस्टर में बस 819 वोटों की एंट्री की थी. अब सवाल है ये जादू या गड़बड़ी फिर हुई कैसे और किया किसने?

ईवीएम मशीन. फोटो साभार: इन्टरनेट

इसका जवाब दिया है जैतपुर के रिटर्निंग अफसर जी सी देहारिया ने. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए बताया,

पोलिंग अफसर ने जितने वोट रजिस्टर किए, उसमें और EVM के दर्ज किए गए आंकड़े में 45 वोटों का फर्क है. हमने 30 नवंबर को ही अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेज दी थी. वोटों की गिनती में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. ऐसा लगता है कि असली मतदान शुरू होने से पहले बूथ के प्रिसाइडिंग ऑफिसर EVM में से मॉक डेटा डिलीट करना भूल गए थे. हमारे पास VVPAT पर्चियां हैं. गिनती के समय इनसे भी मदद मिलेगी. 

 

क्या होता है मॉक डेटा?

अब ऐसे में सवाल है की ये मॉक डेटा क्या बाला है जिसे येलोग डिलीट करना भूल गए. इसका जवाब दिया अनुभव श्रीवास्तव ने जोकि जिला चुनाव अधिकारी हैं. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए बताया कि इसमें ज्यादा घबराने वाली कोई बात नहीं है. ये एक छोटी सी दिक्कत है. उन्होंने आगे कहा कि हर चुनाव में मतदान से पहले हर पार्टी के कुछ लोगों को वोट डाल कर मशीन को चेक करने के लिए कहा जाता है. ताकि उन्हें यह संतुष्टि मिल जाये कि मशीन ढंग से काम कर रही है. इसी झूठे मुठे वोट को मॉक वोट कहते हैं. अनुभव श्रीवास्तव ने आगे बताते हुए कहा

इस डेटा को बड़ी आसानी से असली मतदान के आंकड़ों के साथ मैच किया जा सकता है. ऑर्ब्जवर ने इस मामले की रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेज दी है. हम पोलिंग ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे. मगर वो हमारी आंतरिक प्रक्रिया है.

अब भाई, अपराध इतना गंभीर है तो कार्यवाई तो जरुर होनी चाहिए. खैर जो भी होना है वो होके ही रहेगा और हम आपको वो खबर भी अपने अंदाज में बताते रहेंगे. आपको बस एक काम करना है की हमारा फेसबुक पेज लाइक करना है ताकि हम आप तक और आप हम तक इसी तरह बेहद आसानी से पहुँचते रहें और ये साथ बना रहे.

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