आप अगर भारत के हिंदी भाषी इलाके में रहते हैं तो आपसे एक सवाल है की आपने क्या आजतक एक भी भोजपुरी फिल्म देखी है? शायद अगर आप बिहार या उत्तरप्रदेश से हों तो कह भी दें की “हाँ, बचपन में एक देखी थी.” पर अगर आप इन दो प्रान्तों से बाहर के हैं तो शायद आपका जवाब नहीं में ही होगा. अरे, घबराइये मत. मैं आपको कोई लेक्चर नहीं देने वाला कि आप जैसे ही लोग जिम्मेदार हैं मरते भोजपुरी सिनेमा के फलाना ढिमकाना.

ऐसा इसलिए क्योंकि मैं जानता हूँ कि इसकी वजह क्या है. वैसे तो बहुत सी वजहें होंगी भोजपुरी सिनेमा न देखने की, लेकिन सबसे बड़ी वजह है भोजपुरी सिनेमा में फैले भौंडापन यानी की अश्लीलता. मैं यह आर्टिकल करते करते अपने कलीग से भी भोजपुरी सिनेमा के ऊपर बात कर रहा था. मैंने उनसे पूछा-  बताइये आप भोजपुरी सिनेमा क्यों नहीं देखते? उन्होंने जवाब दिया कि इसकी सबसे बड़ी वजह है अश्लीलता. मैंने फिर से पूछा – वो तो बॉलीवुड में भी है और हॉलीवुड में भी। पर भोजपुरी फिल्मों के अश्लीलता और उनकी अश्लीलता मे क्या अंतर है?

यहाँ एक बात सोचने वाली है और सच है। बात यह है कि हॉलीवुड मे न्यूडीटी भी होती है, सेक्स सीन भी होते हैं। लेकिन उसका विरोध हम सिर्फ इसलिए दर्ज नहीं कराते हैं क्योंकि वहाँ इनका उपयोग किसी खास दृश्य को दिखने या कहने के लिए होता है। यदि किसी फिल्म मे जरूरत से ज्यादा सेक्स सीन है, हॉलीवुड हो या बॉलीवुड तो उसे ‘ए’ सेर्टिफिकेट मिलता है। लेकिन भोजपुरी फिल्मों मे सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यही है। जिस प्रकार से पारिवारिक फिल्मों के नाम पर देवर-भौजाई के रिश्ते के बीच जरूरत से ज्यादा सेक्सीज़्म दिखाई जाती है उसे देखकर कहीं से नहीं लगता आप एक पारिवारिक फिल्म देख रहे हैं। दिक्कत यह है कि यह थम नहीं रहा है। धड़ल्ले से चल रहा है और इसपर लगाम लगाने वाला भी कोई नहीं है। लेकिन फिर भी, एक कोशिश से इसे ठीक किया जा सकता है। ऐसे समय मे जब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ऐसे दो अर्थी गानों और फिल्मों से पता पड़ा है, वहाँ एक ऐसी भोजपुरी फिल्म बनाना जिसे बेस्ट बैक्ग्राउण्ड साउंड के लिए पुरस्कार मिले उतना आसान नहीं है।

अमित मिश्र, निर्देशक, ललका गुलाब

अमित मिश्र द्वारा निर्देशित भोजपुरी शॉर्ट फिल्म ‘ललका गुलाब’ को your quote द्वारा आयोजित लैड्ग्वेज फेस्टिवल 2018 मे बेस्ट ओरिजनल बैक्ग्राउण्ड स्कोर का अवार्ड मिला। इस फेस्टिवल की खासियत थी कि यहाँ भारतीय भाषाओं व उनकी सिनेमा को तरजीह दी गई जो काबिल-ए-तारीफ़ है। फिल्म ललका गुलाब मैंने लगभग डेढ़ साल पहले देखि थी। फिल्म देखकर थोड़ी देर के लिए सन्न रह गया। कुछ समय बाद अमित को मैसेज किया और बधाई दी।

पोस्टर, ललका गुलाब

यह पहला मौका था जब मेरी बात अमित से हो रही थी। उनके अंदर का जज्बा देखकर लगा कि वह दिन ज्यादा दूर नहीं है जब मैं एक अच्छी भोजपुरी फिल्म देख पाऊँगा। अमित हमेशा कहते हैं कि कोशिश जारी है, तो उनके कोशिश को हमारा सलाम और पूरा साथ। चलिये फिर चलते चलते आपको ललका गुलाब भी दिखा देते हैं-

 

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