यह कहानी है फ़रवरी 1945 के उस अंधेरी रात की. सर्द, घनी और अंधेरी रात के बीच इलाहबाद की नैनी जेल के दरवाजे पर एक पुलिस वैन आकर रूकती है, जिसमें से एक बुजुर्ग व्यक्ति निकलते हैं. वैन से निकलते ही वे सड़क की दूसरी तरफ देखते हैं जहाँ उस तरफ एक औरत अपने हाथों में 7-8 महीने के छोटे से बच्चे को लेकर खड़ी है.
वह बुजुर्ग व्यक्ति और सड़क पार खड़ी वह महिला भारतीय राजनीति के 37 साल का इतिहास लिखने वाले थे. यह जानना रोचक है की क्यों बात की जा रही इन लोगों की? कौन हैं ये लोग और इनकी भूमिका भारतीय इतिहास में किस तरह से रही है? आपको बता दें की यहाँ बात हो रही है पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी की.
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नेहरू जी उस समय भारत छोड़ो आंदोलन के कारण इलाहबाद के नैनी जल में बन्द थे. जब वे जेल में बंद थे तब उन्हें पता चला की इंदिरा गाँधी यानि की उनकी बेटी माँ बन गयीं हैं. नेहरू जी के लिए वह पल बहुत ख़ुशी का था क्योंकि वे नाना बन चुके थे. इंदिरा जेल के अंदर अपने पिता के लिए खत लिखा करती थीं और बच्चे की तस्वीरें भेजा करती थीं.
फ़िरोज़ गाँधी को कहीं से खबर लग गयी थी कि अमुक तारीख को नेहरू जी को एक जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाना है और ट्रांजिट के दौरान वे एक रात इलाहाबाद के नैनी जेल में गुजारेंगे. इसलिए इंदिरा और फ़िरोज़ अपने बेटे राजीव के साथ मिलने पहुँच गए.  फ़रवरी 1945 की रात, वह पहला मौका था जब नेहरू जी ने बच्चे को सामने से देखा था.

कुछ ऐसे हुआ राजीव का नामकरण – 

 जब फ़िरोज़ और इंदिरा नेहरू जी को खत लिखते थे तो कई बार उन्हें नाम सुझाते रहते थे जिनमें से एक नाम चुना गया ”राजीव”. इस नाम के पीछे का कारण बहुत अनोखा है.
इंदिरा और राजीव गांधी                                     Image Source: Google
वस्तुतः 8 वर्ष पूर्व नेहरू जी की पत्नी की मौत हो गयी थी. नेहरू की पत्नी का नाम कमला था और राजीव का अर्थ भी कमल होता है. अभी कहानी यहीं ख़त्म नहीं हो जाती. राजीव के नाम के आगे दो शब्द और जुड़े हुए थे, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं पता है. राजीव के  नाम के आगे जुड़ने वाला दूसरा शब्द ”रत्न” था. नेहरू जी ने यह नाम खुद तय किया था जवाहर का अर्थ होता है ”रत्न”. इसका मतलब ये की राजीव का नाम नाना और नानी के नाम से जुड़कर बना था.
तीसरा शब्द भी है वर्जिस….बात ऐसी थी की नेहरू को अपनी पढाई लिखाई में पर्शियन शब्दों का इस्तेमाल करना पसंद था और एक शब्द था जो उनके दिल में बहुत खूबसूरती से अपनी जगह बना चुका था. वह शब्द था बिरजिस जिसका मतलब होता बृहस्पति या गुरु.

पर्शियन माइथोलॉजी के हिसाब से बिरजिस देवताओं के पिता या राजा हुआ करते थे. वहीँ दूसरी ओर भारतीय रीति-नीति से बृहस्पति को देवताओं का गुरु या स्वामी माना जाता है. तो इस तरह से राजीव गाँधी का जो पूरा नाम था वह था राजीव रत्न गाँधी वर्जिस. नेहरू का राजीव के नाम को लेकर एक और इच्छा थी और वह यह की राजीव के नाम में नेहरू शब्द भी जुड़ जाये लेकिन फ़िरोज़ को यह गवारा नहीं लगा. इसलिए कभी ऐसा हो नहीं सका.

यह आर्टिकल कच्चा-चिटठा के लिए रचना सिंह ने किया है.

 

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