6 दिसंबर 1992. भारत के इतिहास में याद रखी जाने वाली तारीख. एक ऐसी तारीख जिसका ज़िक्र इतिहास से जुड़े प्रश्नों के जवाब में हमेशा आता रहेगा. एक ऐसी तारीख जो राजनीति के मुद्दे से होते हुए धर्म के मुद्दे में तब्दील हो गई. एक ऐसी तारीख जिसने समाज के एक बहुत बड़े तबके को हिस्सों में बाँट दिया. एक ऐसी तारीख जिस दिन कट्टर राजनीति का शिकार हुये लोगों ने धर्म के नाम पर संविधान को ताक पर रख दिया. इस तारीख को नाम दिये गए. ‘बाबरी मस्जिद विध्वंस का दिन’ और ‘अयोध्या कांड.’ ये नाम आगे चलकर ‘राम जन्म-भूमि विवाद’ और ‘अयोध्या विवाद’ के नाम से जाना जाने लगा. राजनेताओं ने इस दिन घटी घटना के सहारे वोट बैंक बनाया, सत्ता हासिल की, सरकारें बनाई और इस प्रक्रिया को ‘सुचारु’ रूप से आज तक चला रखा है. ‘पार्टी विशेष’ ने जनभावना को आधार बनाकर वादे किए और नारा दिया ‘मंदिर वहीं बनाएँगे.’ नारा सोशल मीडिया दौर में मीम मटेरियल बन चुका है. पर मंदिर अब तक नहीं बन पाया. 6 दिसंबर का दंश समाज के बंटे हुये तबके आज तक झेल रहे हैं. मंदिर-मस्जिद का बैर पनपा. लोग हिन्दू मुसलमान से देशभक्त और देशद्रोही तक में बंट गए. सारा देश अभी तक इस दिलचस्प(सरकारों के लिए) मुद्दे में फंसा और बंटा हुआ है.

ख़ैर हमने इस दिन का इतिहास खंगाला तो हमें पता लगा कि 6 दिसंबर 1992 को तथाकथित हिन्दुओं द्वारा मस्जिद गिराए जाने का बदला पाकिस्तान में तथाकथित मुसलमानों द्वारा कई मंदिरों को ढहाकर लिया गया था. अयोध्या में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखकर मस्जिद गिरा दी गई थी. पाकिस्तान में ठीक इसका उल्टा हुआ. (पाकिस्तान में तब कुल जनसंख्या के लगभग 2% लोग हिन्दू और 97% लोग मुसलमान थे.) 8 दिसंबर 1992 को ‘The New York Times’ में प्रकाशित ख़बर के आधार पर हमें मालूम हुआ कि बाबरी गिराए जाने की ख़बर फैलने के बाद दोनों देशों में नफ़रत भी उतनी ही तेजी से फैली थी. और उन्हीं दिनों के दौरान पाकिस्तान के शहरों में कई हिन्दू परिवारों समेत करीब 30 हिन्दू मंदिरों को क्षति पहुंचाई गई थी-

जैन मंदिर, लाहौर/ फोटो साभार – गूगल इमेज

1 – सबसे पहले लाहौर के एक जैन मंदिर को निशाना बनाया गया था. हजारों की तादात में जुटे हुए लोगों ने बुलडोजर से मंदिर ढहा दिया था. साथ ही आसपास के 6 मंदिरों में आग लगा दी गई थी. इनमें से कुछ मंदिरों में विभाजन के दौरान पाकिस्तान आए कुछ हिन्दू परिवारों ने शरण भी ले रखी थी.

कराची का एक मंदिर/ फोटो साभार : गूगल इमेज

2 – कराची और दक्षिणी सिंध में करीब 5 मंदिरों में आग लगा दी गई थी. इसके अलावा वहाँ मौजूद हिन्दू परिवारों की कई दुकानों और घरों को भी भीड़ ने निशाना बनाया था.

शीतला देवी मंदिर, लाहौर/ फोटो साभार – गूगल इमेज्स

3 – लाहौर में स्थित शीतला देवी मंदिर को तोड़ने की कोशिश की गई थी. पर भीड़ को सफलता नहीं मिल सकी थी. आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त इस मंदिर में आज भी कुछ शरणार्थी रह रहे है.

कल्याण दास मंदिर, रावलपिंडी/ फोटो साभार: गूगल इमेज्स

4 – 1992 में ही उन्मादियों के एक समूह ने रावलपिंडी स्थित कल्याण दास मंदिर में हमले की असफल कोशिश की थी. फिलहाल इस मंदिर में नेत्रहीन बच्चों के लिए स्कूल चलाया जा रहा है.

कृष्ण मंदिर, रावलपिंडी/ फोटो साभार : शिराज़ हसन, बीबीसी(ट्विटर)

5 – भारत में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की ख़बर मिलते ही रावलपिंडी स्थित एक कृष्ण मंदिर का गुंबद उन्मादियों द्वारा गिरा दिया गया था. इस मंदिर में आज भी हिन्दू परिवार पूजा करने आते है.

ख़ैर.. ये रही इतिहास और जनरल नॉलेज वाली ख़बर. इसको लिखने के बाद पढ़ते हुये मेरे जेहन में हरिवंश राय बच्चन की लाइनें आई थीं. मन किया आपको पढ़ाता चलूँ, सो हाज़िर हैं. गौर करना न करना आप पर..

‘मंदिर मस्जिद बैर कराते, मेल कराती मधुशाला.’

PS – इस लाइन को पढ़ते हुये मुझे शराबी कतई न माना जाए. मैंने आज तक अपने पैसों से एक नये पैसे तक की शराब नहीं पी है.

जय श्री राम, खुदा खैर करे.

(साभार – मंदिरों की जानकारी से जुड़े इनपुट बीबीसी हिन्दी से लिए गए है.)

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