याद है 2011 का वर्ल्डकप फाइनल? याद ही होगा, ऐसी चीजें भुलाए नहीं भूली जाती. बहुतों को तो गेंद दर गेंद याद होगी लेकिन जिनकी इतनी तेज याददाश्त नहीं है. उनको कुछ चीजें तो जरुर ही याद होगी. जैसे की धोनी का वह विनिंग छक्का या फिर रवि शास्त्री के वो शब्द, “धोनी फिनिशेज ऑफ इन हिज स्टाइल..इंडिया लिफ्ट्स वर्ल्डकप आफ्टर 28 इयर्स….” या फिर नॉन स्ट्राइक छोड़ पर आँखों में आंसू लिए युवराज सिंह या फिर गंभीर की फाइनल में 97 रन की पारी. हर चीज बिलकुल ठीक उसी तरह से याद होगी जैसी हुई थी.

धोनी का वो छक्का और युवराज का रोना, हर वो वाकया हमारे दिलोदिमाग में छप सा गया है. फोटो साभार: इन्टरनेट.

अब थोडा पीछे चलते हैं. 2007 का टी-20 वर्ल्डकप फाइनल. मैदान था साउथअफ्रीका के जोहान्सबर्ग का वंदेर्र्स स्टेडियम. इसको याद करेंगे तो आपको याद आयेंगे लम्बे बालों वाले धोनी या फिर मिस्बाह उल हक का वो गलत शॉट या फिर दौड़ कर कैच लपकते श्रीसंत या फिर गंभीर की 54 गेंदों में खेली गयी 75 रन की महत्वपूर्ण पारी.

वो ट्राफी एक शुरुआत थी और दहाड़ थी भारतीय शेरो के. फोटो साभार: इन्टरनेट.

इनदोनो वाकयों में चार चीजें कॉमन हैं; फाइनल, जीत, धोनी की कप्तानी और गंभीर. कहा जाता है की एक खिलाड़ी तब महान बनता है जब वो गेम प्रेशर झेल कर उसमें निखर कर सामने आता है. इस मामले में गंभीर को महारत हासिल थी. ऐसा लगता था की ये बंदा बना ही है फाइनल के लिए.

पर, मंगलवार 4 दिसंबर के दिन देश के बेहतरीन ओपनरों में से एक रहे गौतम गंभीर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया. 37 साल के गंभीर ने एक ट्वीट और एक भावुक विडियो सन्देश के ज़रिये ये साझा किया. गंभीर भारत की तरफ से 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी-20 खेल चुके हैं. उन्होंने कहा,

“सबसे मुश्किल फैसले भारी दिल से लिये जाते हैं. आज भारी मन से मैं वह ऐलान कर रहा हूं जिससे मैं पूरी जिंदगी डरता रहा.” गंभीर ने ट्वीटर और फेसबुक पे ये पोस्ट किया.

2003 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे खेलते हुए इन्होने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में अपना आगाज़ किया और अगले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इन्होने अपना टेस्ट डेब्यू किया. 2010 से 2011 के बीच ये भारतीय टीम कि कप्तानी भी कर चुके हैं. गौतम गंभीर 2007 और 2011 के विश्व कप के विजयी टीम के हिस्सा भी रह चुके हैं. उन्होंने घोषणा करते हुए कहा,

“रणजी ट्राफी का अगला मैच  आन्ध्रा के खिलाफ मेरा आखिरी मैच होगा जो की फिरोजशाह कोटला में खेला जाएगा.” – गंभीर

दिल्ली के इस बाशिंदे की उपलब्धियों की बात की जाए तो इनकी कप्तानी के दौरान खेले गए मैच यानी 2010 से 2011 के बीच में खेले गए 6 वनडे मैचों में, सभी मैचों में टीम ने विजयी पायी है. भारत के जीते हुए दोनों विश्व कप यानी की ट्वेंटी ट्वेंटी(साल 2007) और फिफ्टी ओवेर्स वाला(साल 2011) के फाइनल में इनकी काफी अहम भूमिका रही है.

गंभीर का भारतीय क्रिकेट में बड़ा योगदान

2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में इन्होने ने 54 गेंदों में 75 रनों की पारी खेली थी और 2011 के विश्व कप में इन्होने 122 गेंदों में 97 रनों की पारी खेल के भारत को विजय रथ की ओर अग्रसर किया था. गंभीर इकलौते भारतीय क्रिकेटर हैं और पुरे विश्व में चौथे नंबर के खिलाड़ी है जिसने लगातार 5 शतकीय पारी टेस्ट क्रिकेट में खेली है. ये इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने 300 से अधिक रन लगातार 4 टेस्ट मैचों में बनाया है.गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाईट राइडरस ने दो बार आईपीएल जीती है. इन्हें अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है.

गौतम गंभीर फोटो साभार इन्टरनेट

गंभीर वो इंसान है जो फील्ड पे तो शानदार प्रदर्शन करते ही हैं फील्ड के बाहर भी बेबाकी से बोलने के लिए जाने जाते हैं. वे अपना मत बिना किस झिझक के रखते हैं. सामजिक कार्यों में भी गंभीर बढ़ चढ़ के हिस्सा लेते रहे हैं. गंभीर के बड़े दिल का परिचय इसी से मिलता है कि 2017 में सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 25 जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च गौतम गंभीर उठा रहे हैं.

15 साल इस खुबसूरत खेल को जीने के बाद गौतम गंभीर भले ही मैदान को अलविदा कह कर चले गए हैं पर जब जब भारतीय क्रिकेट फैन्स कभी भी किसी बांये हाथ के बल्लेबाज़ को ओपनिंग करते हुए देखेंगे तो उसमें वो अगले गंभीर की प्रतिभा को उस बल्लेबाज में खोजने की कोशिश करेंगे. गंभीर आप हमें हमेशा याद आयेंगे और आपको आपके भविष्य के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएं. हमें उम्मीद है कि आप ज़िन्दगी के खेल में भी हर फाइनल में शानदार परफॉरमेंस करते नजर आयेंगे.

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