भारत के  पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त सन् 1944 को भारत के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा देहरादून एवं इंग्लैंड से प्राप्त की।

वह इंग्लैंड में भारतीय राजनीति से दूर खुद का भविष्य ऐयर पायलट के रूप में देखते थे। वहीं उन्होंने एन्टोनियो माईनों से शादी कर ली, वो एक इटलियन नागरिक थीं और राजीव गांधी के साथ ही कैम्ब्रिज में पढ़ रहीं थीं। शादी के बाद जब वो भारत लौंटी तो भारतीय संस्कृति के अनुसार उनका नाम बदल कर सोनिया गांधी कर दिया गया ताकि भारत के लोगो से उनको प्यार मिल सके।

राजीव की रूचि राजनीति नहीं थी परंतु इंदिरा चाहती थी कि वो अपने छोटे भाई संजय की तरह राजनीति में आएं। ऐसा तब तक चलता रहा जब तक कि 23 जून 1980 को दिल्ली में हवाई दुर्घटना में संजय की मृत्यु नहीं हो गई। वो वक्त इदिरा के लिए बहुत ही कठिन था जिस कारण राजीव को माँ का साथ देने के लिए राजनीति में उतरना ही पड़ा।

राजनीति में राजीव युग

राजीव की राजनीति में शुरूआत अब हो चली थी लेकिन अभी एक बड़ा बदलाव तो होना बाकी था। जो उनके लिये एक भारी क्षति थी। 31 अक्टुबर 1984 को इंदिरा गांधी के ही एक सिख बाॅडीगार्ड ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। उनकी मौत के बाद देश में सिख दंगे भड़क उठे। हजारों सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया। गुरूद्वारों को आग के हवाले कर दिया गया।

देश दो खेमों मे बंट चुका था पहला इंदिरा की मौत से सदमें और गुस्से मे था और दूसरा सिखों से हमदर्दी रखता था।

राजीव ने देश का मूड भांप लिया था वो जानते थे कि पूरा देश इंदिरा की मौत से गुस्सें मे है ऐसे में अगर चुनाव होते है तो नतीजें उन्हीं के पक्ष में होगें। उन्होंने 24 से 28 दिसंबर के बीच लोकसभा चुनाव कराये और जो नतीजे आये। वो राजनीति के इतिहास में एक रिकाॅर्ड बन गया। इस चुनाव में कांग्रेस को 415 सीटें मिलीं। विपक्ष का पूरी तरह से सूपड़ा साफ हो गया था। विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा।

विपक्ष के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी को भी हार का सामना करना पड़ा और यही से हुई राजीव युग की शुरूआत। 31 दिसंबर 1984 को भारत को सबसे युवा प्रधानमंत्री मिला।

राजीव गांधी के रूप मे देश को एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला जो देश में कंप्यूटर और संचार क्रंाति को लाना चहाता था। राजीव के प्रधानमंत्री बनने से देश में नई सोच एंव ऊर्जा मिली। राजीव गांधी का राजनैतिक जीवन विवादों से भरा रहा। कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन से दोस्ती निभाने के लिए अपने ही कैबिनेट के वित्त मंत्री से दूरियां बढा लीं थीं।

1989 के आम चुनाव में कांग्रेस बहुमत प्राप्त नही कर सकी। इसका एक बड़ा कारण था स्वीडन से बोफोर्स तोपों की खरीद की दलाली का आरोप राजीव गांधी पर लगाया गया।

कांग्रेस दल 1989 में बहुमत न आते हुए भी संसद में सबसे बड़ा दल था। राजीव गांधी ने स्पष्ट जनादेश मिलने तक विपक्ष में बैठना पसंद किया। विपक्षी दलों की सरकारें अपने अंतरविरोधो से बिखर गयी और 1991 में राष्ट्रपति ने मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी। राजीव गांधी इस चुनाव अभियान के क्रम में देश का दौरा कर रहे थे और जनता बड़ी आशा भरी सम्भावनाओं का अनुमान लगा रही थी कि भयंकर षडयंत्र में 21 मई 1991 को उनकी हत्या कर दी गयी।

कच्चा चिट्ठा के लिये यह लेख स्वीटी पाॅल ने किया है।

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