आज हम ऐसे भारत में रह रहे हैं जहाँ एक इंसान दुसरे इंसान के दुःख पर खुश होता है. दुःख होता है यह  सोच कर की  कैसे एक घटना से एक धर्म शोक में डूब सकता है, वहीँ दुसरे धर्म के “कुछ” लोग उसे उत्सव की तरह मनाते हैं. आज का इंसान भावनाओं से खेलना सीख गया है और इस खेल में उसे सबसे अधिक आनंद तब आता है जब किसी की भावना को ठेस पहुंचती है. आज हम बात करेंगे एक दुखद घटना की, आप इसे बाबरी मस्जिद विध्वंस कहें या राम जन्मभूमि विवाद। मेरे लिए दोनों एक ही बात है और आपके लिए दोनों एक ही मुद्दा है. यही फर्क है, जब तक हम भावनाओं को मुद्दा समझते रहेंगे तब तक विवादित स्थल का मसला हल नहीं हो सकता.

 

 

26 वर्ष गुज़र गए उस घटना को जिसने इतिहास के साथ साथ भारत का वर्तमान और भविष्य दोनों को बदल दिया. आज ही के दिन बाबरी मस्जिद का विध्वंश किया गया था, विध्वंश को 26 साल हो गए हैं. वहां रहने वाले कुछ मुसलमान इस दिन को यम-ए-ग़म या यम-ए-सियाह के रूप में देखते हैं और विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल के लोग इसे शौर्य दिवस या विजय दिवस के रूप में मनाते हैं. वे लोगो को दीये जलाने के लिए भी अनुरोध कर रहे हैं.

बाबरी मस्जिद फोटो साभार इन्टरनेट

6 दिसंबर 1992, के दिन पुरे भारत वर्ष से कार्य सेवक अयोध्या में पूजा के लिए एकत्रित हुए थे. भीड़ ने उग्र होकर मस्जिद को गिरा दिया. हिन्दू मान्यता के अनुसार अयोध्या राम की जन्मभूमि है और 16 वी शताब्दी में मुग़ल जनरल मीर बाक़ी ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद का निर्माण किया था. विश्व हिन्दू परिषद् ने मंदिर निर्माण के लिए अभियान चलाया जिसके तहत कई यात्राएं भी निकाली गयी. 6 दिसंबर के दिन भी एक रैली थी साथ ही एक छोटी सी पूजा थी. रैली के उग्र होने के बाद भीड़ सिक्यूरिटी को भेदते हुए मस्जिद के गुम्बद पे चढ़ गयी और मस्जिद को ध्वस्त कर दिया.

इस वाकये के बाद पुरे देश में टेंशन का माहौल हो गया था, कई दंगे भी हुए और कई जाने भी गयी. किसी भी मज़हब में किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं लिखा है चाहे वो मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाना हो चाहे मस्जिद तोड़ कर मंदिर. एक बार को मान ले कि ऐसा हुआ था तो फिर हम क्या कर रहे हैं ? हमने भी तो उसी की तरह मस्जिद तोड़ दिया और अब मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं. तो हम में और उस जनरल में क्या अन्तर है. व्यक्तिगतरूप से मुझे फर्क नहीं पड़ता की वहां मंदिर बने या मस्जिद क्योंकि अयोध्या मे ध्वज किसी भी धर्म का लहराए, दिल्ली मे रहने वाला इंसान तभी सुकून से रह पाएगा जब उसके जेब मे कुछ पैसे और हांथ मे एक पक्की नौकरी होगी।

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