देश और मजहब। इनदोनो का अलग अलग स्थान होता है हमारी ज़िन्दगी में. हो सकता है कि आप अपने मुल्क में अपने नाम से जाने जाते हों या फिर आपका मजहब आपकी पहचान हो. लेकिन जब कभी आप इस देश से बाहर दुनिया में अपनी पहचान बनाने जाएंगे तो आपकी पहली पहचान आपके मुल्क के तौर पर ही होगी। आप अभी बिहारी या बंगाली कहला सकते हैं लेकिन जब दुनिया के सामने जाएंगे तब आप सिर्फ और सिर्फ एक भारतीय ही होंगे और कोई नहीं।

देखिये देश में जो माहौल है, उस अनुसार हमेशा से अल्पसंख्यक निशाने पर रहे हैं. उन्हें देशविरोधी या पाकिस्तान प्रेमी कहने से पहले बहुत से लोग एक बार भी नहीं सोचते हैं और ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं है. दुनिया के लगभग हर देश में अल्पसंख्यकों को शक की निगाह से ही देखा जाता रहा है. चाहे वो पाकिस्तान में हिन्दू हों या फिर श्रीलंका के सिंहली।

भारत में मुसलामानों की आबादी 18 फीसदी है और हिन्दुओं की आबादी 78 फीसदी है. फोटो साभार: इंटरनेट

उत्तरप्रदेश के महराजगंज के एक मदरसे का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो के वायरल होने की एक वजह है. इस वीडियो में एक मौलवी साहब 15 अगस्त के मौके पर तिरंगे को लहराने के बाद बच्चों को राष्ट्रगान गाने से रोक रहे हैं. उनको कहते हुए सुना जा सकता है कि ये इस्लाम में जायज नहीं है. कोई भी राष्ट्रगान नहीं गायेगा।

सवाल है क्यों? बस इसलिए क्योंकि आपके खुदा से ताकतवर कोई नहीं, कुछ नहीं? आप उसके अलावे किसी के सामने सर नहीं झुकायेंगे? आप उसके अलावे किसी की तारीफ़ नहीं करेंगे? आप मूर्तिपूजक नहीं हैं? क्या यही वजह हैं जो आपको अपने देश, अपनी मातृभूमि के गुणगान या उसके सम्मान में चंद शब्द पढ़ने से रोक देती है?

क्या शहीद औरंगज़ेब ने कभी तिरंगे को सलामी नहीं दी होगी या फिर राष्ट्रगान नहीं गाया होगा? उसका मजहब भी तो इस्लाम ही था तो क्या फिर आप उसे मुसलमान नहीं मानेंगे? फोटो साभार: इंटरनेट

ये कैसी पाबंदियों के साथ जी रहे हैं आप? क्या आप अपने माँ बाप का सम्मान नहीं करते हैं? क्या आप अपने लायक औलाद की तारीफ़ नहीं करते हैं? आपको समझने की जरुरत है कि तिरंगा कोई मूर्ति नहीं है, न ही कोई भगवान् है. जब आप तिरंगे को सलामी देते हैं तो आप बस झंडे को सलाम नहीं करते। आप सम्मान करते हैं अपने देश का, अपने लोगों का और अपनी जन्मभूमि का और क़र्ज़ अदा करते हैं जो कुछ भी इस मुल्क ने आपको दिया है. आप इतने कृतघ्न कैसे हो सकते हैं?

आप हक़ से कहते हैं कि बहा है खून हर किसी का इस देश की मिटटी में, किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़े ही है. तो जिस मातृभूमि के लिए आप शीश कटा सकते हैं उस मातृभूमि के लिए शीश झुकाना कैसे जायज या नाजायज के तर्क पर अटक जाता है?

सवाल ढ़ेर सारे हैं लेकिन मैं आपसे जवाब की उम्मीद नहीं करता हूँ क्योंकि मुझे उम्मीद है कि आप मुझे या मेरे सवालों का जवाब देने से बेहतर देश को सम्मान देने की कोशिश करेंगे। मैं आपके राष्ट्रभक्ति पर ऊँगली नहीं उठा रहा, न ही आपके वतन के लिए कुछ कर गुजरने वाले जज्बे पर शक कर रहा हूँ. बस मैं निराश हूँ क्योंकि ऐसे चंद मौलवी या लोगों की वजह से एक पूरे कौम को अब निशाना बनाया जाएगा और आप उन निशाना बनाने वाले लोगों को ऐसी हरकतों से मौका दे रहे हैं.

मजहब की तालीम से किसी को कोई दिक्कत नहीं है, वो आपका हक़ है. लेकिन देशभक्ति की भावना हर हिन्दुस्तानी के अंदर पैदा करने की जिम्मेदारी भी हम और आप पर ही है. फोटो साभार: इंटरनेट

देश में मात्र 73 प्रतिशत लोग साक्षर हैं. 130 करोड़ आबादी वाली देश में 27 प्रतिशत आबादी ऐसी है जो पढ़ी लिखी नहीं है और उसके अलावे वो 73 प्रतिशत भारतीयों में कई ऐसे होंगे जोकि बस नाम मात्र ही पढ़े लिखे होंगे। ये ऐसे लोग होते हैं जिन्हें जो दीखता है उस पर विश्वास कर लेते हैं. उन्हें कोई मतलब नहीं होता कि आपने इतिहास में देश के लिए क्या किया है या क्या नहीं या फिर आपके मन में देश के लिए क्या भावना है. इनको बहुत ही आसानी से बहलाया और फुसलाया जा सकता है. इनलोगों के मन में ऐसी हरकतें कर के अपने लिए गलत भावना बनाने से बचें क्योंकि इन लोगों की भावनाओ का फायदा उठाना सत्ता में बैठे लोग अच्छी तरह से जानते हैं.

जय हिन्द। जय भारत।

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