“ये भारत है बाबू, यहाँ लोग कब क्या काम कर जाएँ कुछ कहा नहीं जा सकता.”

हम ऐसे ही ये बातें नहीं कह रहे हैं. कर्नाटक का चुनाव तो आपलोगों को याद ही होगा. अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के धुआंदार चुनावी रैली के बलबूते पर कर्नाटक में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी. हालांकि इसका कोई फायदा तो नहीं हुआ और कर्नाटक में सरकार कांग्रेस ने बना ली.

भाजपा ने जो सपने देखे थे, वो कर्नाटक में टूट गए. सारी रैलियां और चुनावी प्रचार बेकार चली गयी. वैसे अब जो खबर आई है उससे एक बात तो साफ़ है कि बिना सत्ता पाए ही भाजपा अब कर्नाटक के किसानों के काम आ रही है.

खेतों में इस्तेमाल हो रहे भाजपा नेता के कटआउट. फोटो साभार: इंडियाटाइम्स

दरअसल खबर है कि चुनावी रैलियों में इस्तेमाल होने वाले भाजपाई दिग्गज अमित शाह, नरेन्द्र मोदी और भाजपा के  मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के कटआउट का इस्तेमाल अब कर्नाटक के किसान अपने खेतों में कर रहे हैं ताकि कौवे भगाए जा सकें. जी हाँ, यह खबर बिलकुल सच है. कर्नाटक के तारिकेरे के लक्कावल्ली इलाके के किसान इस कारनामे को अंजाम देने की वजह से चर्चा में आ गए हैं.

किसानों की मानें तो इस बार इलाके में बारिश अच्छी हुई है और लगभग लगभग हर खेत में बुआई का काम पूरा हो चुका है. ऐसे में वे कौवे उड़ाने के लिए नेताओं का कटआउट खेतों में लग रहे हैं. अर्धशहरी इलाके में ये कटआउट वोट बटोरने और चुनावी प्रचार के लिए लगाए गए थे, जिनका चुनाव ख़त्म होने के बाद कोई काम नहीं था. ऐसे में किसानों ने इन कटआउट का इस्तेमाल अपने खेतों में करना शुरू कर दिया. गाँव वाले बताते हैं कि वे पहले लकड़ी के फट्टे और पुतलों का इस्तेमाल कौवे उड़ाने के लिए किया करते थे.

अब ऐसे में मुझे येदियुरप्पा साहब का वह बयान याद आता है जिसमे सत्ता में न आने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा था, “बस इस बात का अफ़सोस है कि अब हमलोग कर्नाटक की जनता की सेवा नहीं कर पायेंगे.”

येदियुरप्पा साहब के लिए अब शायद यह खबर कुछ खुशियाँ तो लेकर आएँगी. कम से कम सत्ता में न रहने के बाद शरीर से न सही लेकिन उनके कटआउट जनता की सेवा जरुर कर रहे हैं.

ये खबर पहली बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी थी.

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